Storytelling, songs, role play and drama: Secondary Maths (English commentary)


Commentary:
In this secondary maths class, the teacher asks his students to perform role plays that
show how the maths they have learnt relates to everyday life. The class are consolidating
what they have learnt previously about surface area and the volume of solid shapes.
Teacher: जो groups हैं, हमारे पास,¬¬ कुछेक, इन्होंने
अपना लघुनाटिकाओं के द्वा¬रा इन चीज़ों
को दर्शाने की कोशिश की है। Group 1, जो आपके
सामने है, इन्होंने एक नाटिका बनाई हुई
है। ठीक है? Commentary:
The teacher asks Group 1 to start the lesson by presenting their play to show the relationship
between the volume of a cone and a cylinder. Teacher: आप आएँ और अपनी
लघुनाटिका प्रस्तुत करें।
Student 1: नहीं नहीं! हम ज्यादा लेंगे!
Student 2: नहीं, हम ज्यादा लेंगे!
Student 3: हम लेंगे! हर बार तुम ज्यादा लेते
हो! Student 4: अरे! ये कैसा
शोर है? ये क्या कर रहे हो तुम लोग?
Student 3: दादाजी… Commentary:
Imaginatively, the students use a family dispute to illustrate the idea.
Student 4: पूजा बहन! ये ऐसे हमेशा लड़ा करते
हैं! तो आप ऐसा कुछ बताइए, कि तीनों को,
इसमें जो भी हो, बराबर-बराबर मिल जाए।
Student 5: रुकिये, भैया! अभी मैं आती हूँ।
ये लीजिए भैया, इन तीनों को इससे बाँट
के देखिए। Student 4: लाइए!
ये लो तुम! ये लो तुम भी!
Student 5: देखो भैया! अब ये खाली हो गया!
Student 2: लेकिन बुआजी! आपने ऐसा क्या किया
– जो तीनों लोगों को बराबर मिल गया?
Student 5: एक ऐसा शंकु बनाओ। शंकु का आधार, बेलन
के आधार के बराबर हो। और शंकु की ऊँचाई,
बेलन की ऊँचाई के बराबर हो। अब, कभी
भी ऐसे लड़ना नहीं! कोई भी चीज़ चाहिए,
तो यही technique अपना लेना। Student 2: जी, बुआजी!
Student 3: जी, बुआजी! Commentary:
This teacher has confidence in his students and trusts them, so he stands at the back
of the class to watch the role plays. Teacher: बच्चों ने एक
समूह में ये नाटिका प्रस्तुत की…
Commentary: The teacher explains that Group 1 has shown
the volume of a cone to be one third that of a cyclinder of the same width.
Teacher: बात समझ में आ गई?
Students: Yes, sir. Student 4: जब हम लोगों को
sir पढ़ा रहे थे, आयतन के बारे में, शंकु
के…। उसमें मज़ा भी बहुत आया। तो हमने
सोचा, इसको छोटासा नाटक बना के, present करके,
class में दिखाएंगे। Student 6: जो हम आपस में
भाई-बहन लड़ते हैं… कम-ज़्यादा सामान
के लिए… हम लोगों में, अब घर में, आपस
में बँटवारा बराबर कर सकते हैं। आयतन
निकालना हमको आ गया। Teacher: अब हमारे पास,
दूसरा group आएगा। वह अपनी नाटिका प्रस्तुत
कर रहे हैं, आपके सामने। ठीक है?
Commentary: These role plays provide opportunities for
students to work in groups and for the teacher to assess their understanding.
Student 7: मेरे पिताजी को एक डब्बे पे paint
करवाना है। अपने पिताजी की आकृति
बनवानी है। क्या आप बना देंगे?
Student 8: जी। Student 7: जी, बात करिए,
पिताजी से। Student 8: क्या है बाबूजी?
Commentary: This next group presents a commercial transaction
with a painter to illustrate their maths points. Student 9: किस हिसाब से
एक हजार रुपया ले रहे हैं?
Student 8: अच्छा! तुम बता दो। कितना लगेगा?
ये भी मेरे साथ आएँ हैं।
Student 10: एक वर्ग सेंटीमीटर का लगेगा आपका, दो
रुपए। Student 9: आपका कहना है
कि मतलब, एक वर्ग सेंटीमीटर की पुताई का…
Student 10: दो रुपए लगेंगे। Student 9: दो रुपए लगेगा!
अच्छा! बेटा, रमेश! सुरेश! यहाँ आओ ज़रा!
Student 11: जी, पिताजी। Student 7: हाँ, पिताजी।
Student 9: अरे! जो painter बेटा ले कर आए हो, वो तो
बहुत महँगा बता रहा है! कह रहा है, एक हजार
रुपया हम लेंगे! Student 5: जो रामराज ने
end का वो किया ऐसे कोई… Commentary:
Afterwards the students describe how this type of activity helps them to feel more confident
using maths outside school. Student 5: और सही पैसे दे
सकते हैं। Student 12: Sir से हम लोग नहीं
डरते थे। लेकिन हम लोगों के मन में यह
डर रहता था कि हम लोग blackboard पे कुछ गलत कर
देंगे; सारे बच्चे देखेंगे कि इसको
सवाल नहीं आता। तो इस वजह से डर लगता
था। Commentary:
The teacher encourages another group to present their role play. One of the group enacts the
teacher’s role and instructs students to calculate the volume of items in their home.
Student 12: आपने देखा कि हमें कहीं भी किताब
में, ऐसी चीज़ें नहीं दी होंगीं। जो भी
कुछ हम लोग देखते हैं, समझते हैं, हम
लोग उसीको करते हैं। Practical हम लोग करते हैं,
उसका। किताबी ज्ञान तो केवल examination के लिए
होता है। ये ज्ञान हमारा, जीवनभर काम
आएगा। और सभी बच्चे, जाएँ – अपने घर पर,
और इसके आयतन – जो भी कुछ मिले – बेलनाकार,
शंकु-आकार और ball – उसका निकालें आप, आयतन।
और जो न समझ में आए, हमसे पूछें।
Student 4: और फिर sir ने जो बात कही थी, वो अच्छी
कही थी! Practical करके देखेंगे, तो हमारी daily life में
भी काम आएगा। Commentary:
The student explains that learning practically is more memorable and relevant to real life
than book-based learning for exams. Student 4: तो… सिर्फ paper
तक ही आ पाएगा। बाद में, भूल भी सकते हैं,
हम लोग। Commentary:
These students are relating their school maths to everyday problems. How could you do this
with your classes?

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4 Responses

  1. Maria Luisa Madrid Lopez says:

    Hello everyone, I choose this video at the bigining because I thinks that teach math is so hard and I want learn how I can teach math in an active learning and that was so good, because everybody are paying attention in the role play and the teacher make feedback to the students, and they get a beetter comprehension of the topic.

  2. taramani toppo says:

    I am very happy to say that the students here trying to follow the teacher it will bring a confidence,willingness in other students to act like this, the teacher is doing well. i am sure that the students will get improved with like these activities,and the goal of education will be in proper target.

  3. SAGAR TRIPATHI says:

    Very interactive way of learning.
    Teacher did very well to pay attention to every student, even the weaker ones.

  4. Jaya Tripathi says:

    a very interactive session and one of the best method to remove the fear of maths from the minds of children.

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